रविवार, 13 जून 2010

संगठन का पंजीकरण और संयुक्त बैंक खाता इसी माह। दिग्‍दर्शिका का समाजार्पण। संगठन के विकास के लिए कठोर निर्णय लिये जाने होंगे- वैद्यजी

कोटा-13 जून। कोटा नगर के दाक्षिणात्‍य वेल्लनाडु ब्राह्मण सजातियों की माह जून की बैठक संगठन सचिव श्री किशोर कुमार शर्मा के दादाबाड़ी निवास पर सोल्लास सम्पन्न हुई। बैठक सायं 5 बजे आरंभ हो गयी। आरंभ में श्री किशोर शर्मा ने पधारे सभी सजातियों का स्वागत किया। कार्यकारिणी के सदस्यों के आने के बाद सर्वप्रथम वयोवृद्ध रेही श्री मुरलीधर शर्मा सेवानिवृत्त आयुर्वेदाचार्य जो कि संगठन के सचिव श्री किशोर शर्मा के पिता भी हैं, द्वारा “सान्निध्य स्रोत” के सौजन्य से प्रकाशित दिग्दर्शिका का कलाया खोल कर समाजार्पण किया। 12 पृष्ठीय दिग्दर्शिका को देख कर उन्होंने कहा कि लंबे समय से कोटा झालावाड़ में रह रहे सजातियों को एक दूसरे से सम्पर्क करने और कोटा झालावाड़ से बाहर रह रहे सजातियों से सम्‍पर्क करने में जो असुविधा होती थी, यह दिग्दर्शिका उन्हें और समीप लाएगी। उन्होंने समाज के उन लोगों से भी आह्वान किया, जो लंबे समय से बैठकों में उपस्थित नहीं हो रहे हैं। उन्‍होंने संगठन को और सुदृढ़ बनाने के लिए सभी को यथायोग्य तन-मन-धन से सहयोग करने की अपील की। इसके लिए यदि कठोर निर्णय भी लेने हों तो लिये जायें। उन्‍होंने 1950 के दशक के सुदृढ़ संगठन के बारे में बताते हुए कहा कि उस समय भी “दिव्यादर्श” जैसी पत्रिका निकलती थी। "निर्णय सिंधु" के निर्णयों का कठोरता से पालन किया जाता था। संगठन की समाज में धाक थी। समाज के वरिष्ठ आचार्य और विद्वान् लोगों द्वारा उसे सफलतापूर्वक लंबे समय तक चलाया गया। धीरे-धीरे अनुशासन की कमी, पलायन और संस्कारों के विचलन से समाज की स्थिति धीरे-धीरे निर्बल होती गयी। आज संगठन ही नहीं समाज की दशा भी शोचनीय है। इसके लिए सार्थक प्रयास करने होंगे।
संगठन के सचिव श्री किशोर कुमार शर्मा ने कहा कि दिग्दर्शिका की एक-एक प्रति हमारे सजातीय बहुल्य नगरों जयपुर, बीकानेर, अहमदाबाद, मुंबई आदि भी भेजी जाएगी और वहां स्थापित सजातीय इकाइयों के माध्यम से कोटा की पहचान बढ़ायी जाएगी। संगठन के कार्यकारी सदस्य श्री सुबोध तैलंग ने बताया कि समाज की कोटा में एक विशेष प्रतिष्ठा है। समाज के अंतर्गत आने वाले पुष्टिमार्गीय वल्लभ सम्प्रदाय के मंदिर जैसे श्री मथुराधीशजी, बड़े महाप्रभुजी, जैजै मंदिर आदि मंदिरों के लाखों लोग अनुयायी हैं और शहर में इनका एक अलग स्थान है।
बैठक में उपस्थित "सान्निध्य स्रोत" के संपादक और सजातीय सदस्य श्री गोपाल कृष्ण भट्ट ‘आकुल’ ने भी बताया कि दिग्दार्शिका में समय-समय पर होने वाले संशोधनों को ईमेल के माध्यम से उनके ब्लॉग “सान्निध्य स्रोत” में आदिनांक/अपडेटेड किया जाता रहेगा और संगठन चाहेगा तो नये समाजोपयोगी साहित्य के साथ नयी कार्यकारिणी के काल में दो वर्ष में एक बार इसे पुनर्प्रकाशित किया जा सकेगा। उन्होंने सभी सदस्यों को और संगठन के पदाधिकारियों का आभार प्रदर्शित किया और कहा कि उन्होंने समय निकाल कर दिग्दर्शिका के लिए पते, मोबाइल नं- और ईमेल पते आदि उपलब्ध करवाये। भट्ट ने यह भी आग्रह किया कि आज कोटा में भी युवावर्ग तकनीकी साधन संसाधनों का उपयोग ज्यादा से ज्यादा करने लगा है, इसलिए उन्होंने विशेष रूप से समाज के लिए ‘सान्निध्य स्रोत’ का ई संस्करण http://saannidhyasrot.blogspot.com विकसित किया है, इसलिए समाज की नयी-नयी जानकारी जो भी हो, उनके ईमेल पते, ब्लॉग को उपलब्ध करवायें, ताकि देश-विदेश में बैठे हमारे सजातीय इस पत्रिका के माध्‍यम से समाज की जानकारी प्राप्त कर सकें। लंदन, अमेरिका, आस्ट्रेलिया, रूस, कुवैत, इजिप्ट आदि अनेकों देशों में हमारे सजातीय अपनी आजीविका के लिए बसे हुए हैं।
बैठक में महिला सदस्‍यों ने भी बढ़ कर हिस्‍सा लिया। प्रतिनिधि श्रीमती संध्‍या तैलंग ने नये चुनाव कराने पर बल दिया। उन्‍होने भी पत्रिका को एक सराहनीय कदम बताया और कहा कि इससे समाज के लोगों से सम्‍पर्क आसान हो जायेगा। जयपुर से पधारीं अध्‍यापिका और कोषाध्‍यक्ष श्री मदन मोहन तैलंग की बहिन श्रीमती निर्मला तैलंग ने कोटा समाज की सक्रियता पर प्रसन्‍नता व्‍यक्‍त की। उन्‍होंने पत्रिका पढ़ कर कहा कि इसके बारे में जयपुर में प्रचार प्रसार किया जायेगा।
बैठक में संगठन के आगामी चुनावों के बारे में वार्ता हुई। अध्यक्ष श्री प्रभाष तैलंग कोटा से बाहर होने के कारण बैठक में सम्मिलित नहीं हो पाये थे। उनसे मोबाइल पर सम्पर्क किया गया। उन्होंने 11 जुलाई को होने वाली अगली बैठक में उपस्थित होने का आश्वासन दिया और बताया कि संगठन के कार्यकाल के विगत दो वर्षों की समीक्षा भी वहीं की जायेगी।
बैठक में संगठन के पंजीकरण के सम्बंध में एक प्रभावी निर्णय लेते हुए कोषाध्यक्ष श्री मदनमोहन तैलंग ने बताया कि सभी वांछित दस्तावेजात आदि तैयार कर लिये गये हैं। पंजीकरण के लिए कम से कम 11 सदस्यों के साथ जा कर पंजीकरण कार्यालय में उपस्थित होना है, ताकि रजिस्ट्रार पंजीकरण के समक्ष सभी के हस्ताक्षर करवा कर इसे अंतिम स्वरूप प्रदान किया जा सके। अपने कार्यकाल में यदि पंजीकरण हो जाता है, तो संगठन की आने वाली कार्यकारिणी को भविष्य में कोई भी निणर्य लेने में असुविधा नहीं होगी। उन्होंने कहा कि यदि संगठन के चुनाव से पूर्व पंजीकरण हो जाता है, तो शीघ्र ही संगठन का किसी भी राष्ट्रीयकृत बैंक में संयुक्त खाता खुलवा कर संचित कोष की वृद्धि के लिए तीव्र प्रयास किये जायेंगे ताकि आगामी योजनायें मूर्तरूप ले सकें।
बैठक में समाज के लगभग 30 लोगों ने भाग लिया। वैद्य रेही श्री मुरलीधर शर्मा, संगठन सचिव ऱेही श्री किशोर शर्मा- श्रीमती मीनाक्षी शर्मा, कोषाध्यक्ष रेही श्री मदन मोहन तैलंग, जयपुर से पधारीं निर्मला तैलंग पत्‍नी श्री प्रमोद तैलंग, कार्यकारी सदस्या रेही श्रीमती संध्या तैलंग, पंचनदी श्री सुबोध तैलंग, सदस्यगणों में रेही गोपाल कृष्ण भट्ट, बागरोदी श्रीमती हरिप्रिया, रेही श्री नारायण तैलंग, रेही श्री अविनाश तैलंग-पिंकी तैलंग, रेही श्री वरुण शर्मा, श्री महेंद्र कुमार भट्ट, श्रीवत्स‍ श्री अनिल तैलंग- श्रीमती कुमुद तैलंग, आत्रेय श्री नवनीत शर्मा-श्रीमती निर्मला शर्मा, बागरोदी गिरवर भट्ट आदि बैठक में उपस्थि‍त थे।
आगामी बैठक के लिए सचिव श्री किशोर शर्मा ने कहा कि एक बैठक आचार्य गोस्वामी श्री गोपाल लालजी महाराज के निवास श्री बड़े महाप्रभुजी मंदिर पाटनपोल पर भी रखी जायेगी। इसके लिए आचार्य श्री गोपाल लालजी, श्री शरदबाबा से विचार विमर्श कर तिथि तय की जायेगी, ताकि बैठक में संगठन के अभी तक के प्रयासों के बारे में उन्‍हें बताया जा सके और उनसे भविष्य के लिए मार्गदर्शन प्राप्त किया जा सके। आगामी बैठक 11 जुलाई को संगठन के कोषाध्य्क्ष रेही श्री मदन मोहन तैलंग के निवास 106 कृष्णा कुटीर, सराय कायस्थान, कैथूनीपोल, कोटा पर सायं 5 बजे होना तय हुआ। अल्पाहार के पश्चात् बैठक सौहार्दपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुई।
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4 टिप्‍पणियां:

  1. दिग्दर्शिका के लिए हार्दिक धन्यवाद । मीटिंग में आने के लिए ज्यों ही निकलने लगा गाडी के पहिए ने हड़्ताल कर दी । दिग्दर्शिका की प्रतीक्षा है ।

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  2. नमस्‍कार


    शीघ्र डाक द्वारा भेजूँगा।

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  3. शरदजी
    संशोधन कर दिये हैं। आपको दिग्‍दर्शिका मिली होगी। महेंद्र भट्ट के हाथों भिजवायी थी। धन्‍यवाद।
    आकुल

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  4. दिग्दर्शिका मिल गई है । धन्यवाद !

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