रविवार, 7 नवंबर 2010

छोटे महाप्रभुजी ने छप्‍पन भोग अरोगा

कोटा 6 नवम्‍बर। छोटे महाप्रभुजी मंदिर, रेतवाली, स्‍वरूप हाल बिराजमान 817 महावीर नगर द्वितीय में अन्‍नकूट सोल्‍लास सम्‍पन्‍न हुआ। मंदिर ट्रस्‍ट की अध्यक्षा पुष्टिमार्गीय सम्‍प्रदाय वल्लभाचार्य वंशज गोस्वामी रेणुका बहुजी महाराज के दिशानिर्देश में अन्नकूट उत्सव के दर्शन प्रात: दस बजे से साढ़े ग्यारह बजे तक खोले गये। छोटे महापभुजी का सुंदर सिंहासन सजाया गया और भव्‍य शृंगार किया गया। शहर में सभी पुष्टिमार्गीय सम्प्रदाय के मंदिरों में अन्नकूट के दर्शन दोपहर 2 बजे से खुलने के कारण वैष्णवों व कृष्ण भक्तों को अन्नकूट का लाभ लेने के परिप्रेक्ष्य में छोटे महाप्रभुजी के अन्नकूट के दर्शन जल्दी खोलने का निर्णय लिया गया था। रेतवाली, पाटनपोल कोटा में छोटे महाप्रभुजी मंदिर की जीर्णशीर्ण अवस्था के कारण मंदिर स्‍वरूप श्री छोटे महाप्रभुजी को महावीर नगर में उनके जामाता के गृह निवास पर स्‍थानांतरित कर दिया गया है और विग्रह स्वरूप की घर सेवा ही हो पा रही है। दूर होने के कारण भी अन्नकूट के दर्शन जल्दी खोलने से सभी वैष्णव दर्शन का लाभ ले सकें, यह व्यवस्था की गयी और अनेकों वैष्‍णवों को सूचना भिजवाई गयी। अन्नकूट के दर्शनों का लाभ अनेकों वैष्णवों ने बड़ी तादाद में पहुँच कर लिया। प्रात: साढ़े नौ बजे श्रीगिरिराजजी का अभिषेक कर गोवर्धन पूजा की गयी और अन्नकूट भोग लगाया गया। भोग के दौरान परिवार ने अंतर्गृही परिक्रमा की। बाद में दस बजे दर्शन खोले गये। वैष्णवों ने इस अन्नकूट को मिनी छप्पन भोग के रूप में बताया। सखरी, अनसखरी, दूधघर, फलादि अनेकों पक्वान्नों से सुसज्जित इस अन्नकूट को मनोहारी बनाया पाकशास्त्री गो0 ब्रजप्रिया बेटीजी ने, जिन्होंने अकेले ही अन्नकूट की समस्त सामग्री बनाईं। अन्‍नकूट के अवसर पर बेटीजी ने अन्नकूट की महिमा और बनायी गयी सामग्रियों के बारे में भी वैष्णवों को विस्तार से बताया।
उन्होंने वैष्णवों को बताया कि अन्नकूट की दो अवधारणायें प्रचलित हैं। श्रीकृष्णावतार में इंद्रदमन लीला के पश्चात् इंद्र के कोप से वर्षा से नष्ट हुए पूरे गोकुल से गोकुलवासियों को श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत की तलहटी में आश्रय देने के बाद वृन्दावन ले जाकर अस्थायी रूप से स्थापित किया। बाद में गोकुल का पुनर्निर्माण कर उन्होंने गोकुलवासियों का गोकुल ला कर बसाया, जिसकी प्रसन्न्ता में पूरे ग्रामवासियों द्वारा सहभोज आयोजित किया गया, जिसे आज भी वैष्णव भक्‍त प्रकृति प्रेम और गोधन की रक्षा के प्रतीक के रूप में अन्नकूट उत्सव को मनाते हैं। दूसरी अवधारणा के रूप में गो0 बेटीजी ने बताया कि दीपावली उत्सव धन की देवी लक्ष्मी को आह्वान करते हुए लक्ष्मी पूजन के रूप में मनाया जाता है और दीवाली के दूसरे दिन धान्य के देव कुबेर के आह्वान के रूप में अन्नकोट सजा कर धान्य की पूजा के रूप में उन्हें प्रसन्न करने के लिए अन्नकूट के रूप में मनाते हैं, ताकि नववर्ष में घर धन-धान्य से भरा रहे और सुख समृद्धि घर में आये। इस अवसर पर प्राय: पुष्टिमार्गीय मंदिरों में यथाश्रद्धा अन्नकूट सामग्रियाँ बना कर सजाने की प्रथा है। बेटीजी ने कहा कि छप्पन भोग में चावल का कोट नहीं बनाया जाता, किंतु सामग्रियाँ छप्पन प्रकार की बनायी जाती हैं। कुनवाड़ा भी छप्पन भोग का छोटा ही रूप होता है, इसमें भी चावल का कोट नहीं बनाया जाता है। निर्धन का धन चावल सुलभ है, इसलिए ग्रामवासियों के मुख्य भोजन चावल को दृष्टिगत रखते हुए केवल चावल के विशाल कोट के कारण ही इस उत्‍सव को अन्नकूट नाम दिया गया है। केवल अन्नकूट में ही चावल का विशाल ढेर (कोट) गोवर्धन पर्वत के प्रतीक के रूप में बनाया जाता है तथा उसमें शंख, चक्र, गदा, पद्म के नग शिखर श्रीकृष्ण के प्रतीक के रूप में सजाये जाते हैं। छप्पन भोग और कुनवाड़े में विभिन्न पक्वान्नों की संख्या ज्यादा होती है, सखरी यानि कच्चे भोजन सामग्री की सख्या कम होती है, जबकि अन्नकूट में सखरी की संख्या ज्यादा होती है। प्राय: अन्न‍कूट में 18 या 36 सामग्रियाँ बनाने का चलन है। छोटे महाप्रभुजी में सखरी में निम्न सामग्री बनाई गयीं। सखरी में चावल का कोट, शंख, चक्र, गदा, पद्म व शिखर के चार गूँझा नग, पाँच प्रकार के भात- नमकीन भात, मेवा भात, सिख्ररन भात, दही भात, सादा भात, मूँग, रायता, खीर, तुअर व मूँग की दाल, कढ़ी, दही बड़ा, सिखरन बड़ा, काँजी बड़ा, पापड़, बड़ी, मँगोड़ी, पूरी, रोटी, सीरा, थूली, कचौड़ी, चार पाँच तरह के अचार, सेब, पापड़, थपड़ी, सभी प्रकार की प्रचलित पाँच छ: प्रकार की सब्जियाँ, चटनी, चावल के ढोकले, बेसन के खमण , पकौड़ी और पूआ। अनसखरी यानि पक्वान्न में निम्न सामग्री बनायी गयी- मठरी, ठौर, खासा पूरी, तवापूरी, गुँझिया, लोंगवटी, मेवाबाटी, मोहनथार, दीपक, घेवर, बावर, मैसू पाक, बूँदी के लड्डू, सेब के लड्डू, मूँग की दा के बेसन के लड्डू, बूरा बुरकी, बूरा पूरी, खरवंडा, खरंज के गुँझिया, गुड़पपड़ी आदि। दूधघर में पेड़ा, बरफी, काजू कतली, मिश्री, मक्खन, दही, सिखरन, तले हुए मेवे, मक्खन का मैसूपाक, शक्कर के खिलौने आदि सजाये गये तथा फलों में मौसमी फल सिंघाड़ा, अनार, अमरूद, सेब, सीताफल, पपीता, अनन्नास, नारियल, अंगूर आदि परोसे गये।
अन्नकूट के दर्शन के बाद कई वैष्णवों व अन्य को सखरी प्रसाद का वितरण किया गया।


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गुरुवार, 16 सितंबर 2010

समाज की गोठ सी वी गार्डन में आयोजित

चित्र में (बायें से दायें)- श्री नारायण लाल तैलंग, श्री अनिल तैलंग, चि0 गुंजेश भट्ट, चि0 ध्रुव भट्ट, चि0 पीयूष भट्ट, श्री महेंद्र भट्ट, श्री नवनीत आत्रेय, श्री मदन मोहन तैलंग, श्री किशोर कुमार शर्मा, सौ0 ब्रजप्रिया भट्ट, सौ0 मीनाक्षी शर्मा, सुश्री चारु तैलंग, सुश्री रचना आत्रेय, सौ0 किरण भट्ट, सौ0 निर्मला आत्रेय, सौ0 नीलम आत्रेय, सौ0 संध्या तैलंग, सौ0 पिंकी तैलंग, सौ0 जयश्री भट्ट, सौ0 कुमुद तैलंग, चि0 प्रार्थना
कोटा। 12 सितम्‍बर को समाज की 2010 की पहली वर्षा-गोठ रिमझिम फुहारों के बीच बच्चों की किलकारियों में और भी मनोरंजक बन गयी। गोठ के लिए योजना के अनुसार सभी परिवारों की चार दिन पूर्व मंगलवार को बैठक बुलाई गयी और निर्णय लिया गया कि सभी परिवार एक-एक व्‍यंजन बना कर लायेगा और सामूहिक बैठक कोटा के बड़े बाग (सी वी गार्डन) में आयोजित की जायेगी। 12 सितम्‍बर को 11-30 बजे से परिवारों का आना शुरु हो गया। साढ़े बारह बजे चाय पान से गोठ आरंभ हुई। गोठ में सभी ने पूरा मनोरंजन किया। पूरी तरह से हरे वृक्षाच्‍छादित लगभग 1 वर्ग किलोमीटर परिसर में सभी लोग घूमे। युवा वर्ग ने पेडल बोटिंग का आनंद भी लिया। बच्चों ने झूलों, फि‍सलनी आदि पर खेल कर अपना मनोरंजन किया। बाद में सभी ने एकत्रित हो कर अपनी अपनी योजनायें आदि पर बातें की। सभी ने वर्ष में दो बार वर्षा और शरद ॠतु में गोठ आयोजित करने के लिए अपने अपने विचार प्रकट किये। एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे रूस से ग्रीष्‍मावकाश पर लौटे गोपाल कृष्‍ण भट्ट के पुत्र पीयूष भट्ट ने रूस के बारे में रोचक जानकारी दी। गोठ में समाज के श्री गोकुलचंद्र आत्रेय, नवनीत शर्मा(आत्रेय), रेही गोपाल कृष्ण‍ भट्ट, छभैया महेंद्र भट्ट, रेही किशोर कुमार शर्मा, रेही मदन मोहन तैलंग, रेही नारायण तैलंग, श्री अनिल तैलंग, रेही अविनाश तैलंग, श्री गीताप्रकाश भट्ट एवं परिवारों के सदस्‍य थे। गोठ में लगभग 30 लोगों ने भाग लिया।
पीयूष भट्ट द्वारा उच्‍च शिक्षा प्राप्‍त कर रहे छात्रों के लिए प्रमाणपत्रों के अपोस्‍टल कराने की दी गयी महत्‍वपूर्ण जानकारी गोठ की मुख्‍य विशेषता रही।
पीयूष भट्ट रूस में 2006 से एमबीबीएस की पढाई कर रहे हैं। चौथे वर्ष की पढ़ाई पूरी करने के बाद अपने ग्रीष्‍मावकाश में वे जून में कोटा लौटे। पीयूष भट्ट कोटा के श्री गोपाल कृष्ण भट्ट के पुत्र हैं। उन्‍होंने अवकाश में अपने व्यस्त कार्यक्रम के बावजूद गोठ में उपस्थित हो कर सभी से मिल कर सबका आशीर्वाद प्राप्त‍ किया। उन्होंने इस बार अपने व्‍यस्‍त कार्यक्रम के बारे में बताया कि सभी देशों में फ़र्ज़ी दस्‍तावेजों की मदद से फ़र्ज़ी डिग्री ले कर नौकरी हासिल करने के भ्रष्‍टाचार को रोकने के प्रयासों में भारत सरकार और विदेशों की शिक्षण संस्‍थाओं ने पिछले वर्ष से ‘अपोस्‍टल’ के लिए विदेश पढ़ने जा रहे छात्रों के प्रमाण पत्रों का विदेश मंत्रालय से सत्यापन करवाना आवश्‍यक कर दिया है, जिससे भारत आ कर उन्‍होंने इस बार अपनी दसवीं व बारहवीं की अंकतालिकाओं व प्रमाणपत्रों का अपोस्‍टल करवाया। श्री पीयूष ने बताया कि भारत में इस व्‍यवस्‍था के लिए भारत सरकार ने राज्‍य स्तर पर नोडल सेंटर स्‍थापित किये हुए हैं। राजस्‍थान में यह नोडल सेंटर जयपुर में, शासन सचिवालय में, उच्‍च शिक्षा विभाग में स्‍थापित है। छात्र अपनी दसवीं, बारहवीं की अंकतालिका एवं प्रमाण पत्र ५० रु0 शुल्‍क के साथ जमा करायेगा। नोडल सेंटर इसे माध्‍यमिक शिक्षा बोर्ड अजमेर भेजेगा। वहॉं से प्रमाण पत्रों का सत्‍यापन कर बोर्ड कार्यालय प्रमाणपत्रों को जयपुर नोडल सेंटर को लौटायेंगे, जिसे सक्षम सचिव, उच्‍च शिक्षा द्वारा प्रमाणित कर छात्र को लौटा दिये जाते हैं, जिन्‍हें छात्र नई दिल्‍ली स्थित पटियाला हाउस के विदेश मंत्रालय के कार्यालय में प्रति प्रमाण पत्र ५० रु0 शुल्‍क के साथ जमा कराते हैं। अपोस्टल की कार्यवाही पूर्ण कर छात्र को प्रमाण पत्र लौटा दिये जाते हैं। मूल प्रमाण पत्रों के पीछे अपोस्टल स्‍टाम्‍प लगाकर कार्यवाही की जाती है। अत:मूल प्रमाण पत्रों को लेमिनेशन नहीं करवाना चाहिए। यदि करवा रखे हैं तो उन्‍हें कोल्‍ड लेमिनेशन पद्धति से सावधानी से हटवा लेना चाहिए। यह सुविधा बाजार में विशेषकर महानगरों में उपलब्धं है। पीयूष ने बताया कि इस कार्य में लगभग 1 माह व्‍यतीत हो जाता है। पीयूष ने अपने 2 माह के ग्रीष्मावकाश में अपोस्टल की कार्यवाही को प्राथमिकता देते हुए अवकाश व्‍यतीत किये। वे इन अवकाशों में अपने ननिहाल मथुरा, बुआ के यहाँ जूनागढ़, अहमदाबाद, अपोस्‍टल के लिए अजमेर, जयपुर, दिल्‍ली गये। १२ सितम्बर को रात्रि को ही जम्‍मूतावी जामनगर हापा सुपरफास्‍ट एक्‍सप्रेस रेल से वे अहमदाबाद रवाना हो गये। वहाँ से वे १४ सितम्बर को अमीरात फ्लाइट से दुबई होते हुए मास्‍को पहुँचेंगे और वहाँ से अपने शिक्षण संस्‍थान स्टावरोपोल स्‍टेट मेडिकल एकेडमी, स्‍टावरोपोल पहुँचेगे। उन्‍होंने बताया कि अब वे डिग्री पूरी करने के पश्‍चात् 2012 में भारत लौटेंगे।
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सोमवार, 26 जुलाई 2010

सौ0 बेटीजी स्‍नेहलता भट्ट के निधन पर दशाह घाट पर बैठक सम्‍पन्‍न

कोटा। दिनांक 26 जुलाई को भीतरया कुंड में सौ0 स्नेहलता भट्ट के निधन के दशाह घाट के लिए कोटा एवं बाहर से आये सजातीय चम्बल नदी के तट पर शिवालय भीतरिया कुंड पर एकत्रित हुए। रिमझिम के मध्य दशाह में कोटा, अहमदाबाद, बिलखा, राजकोट, जूनागढ़, जतीपुरा, गोकुल, जयपुर, कोलकाता, जामनगर, झालावाड़ से सम्बंधी एकत्रित हुए। दिनांक 17 जुलाई को कोटा निवासी श्रीमती स्नेहलता भट्ट ने 15 दिन हॉस्पिटल में जिन्दगी और मौत से जूझते हुए प्रात: साढ़े सात बजे अंतिम साँस ली थी। झलावाड़ के प्रतिष्ठि‍त बागरोदी भट्ट परिवार में उनका विवाह हुआ था। वे झलावाड़ रियासत के संस्कृत हिंदी के प्रख्यात कवि किंकर तैलंग भट्ट गिरधारी लालाजी के सबसे छोटे पुत्र श्री गिरीश भट्ट की पत्नी थीं। गिरीश भट्ट अध्यापक थे। वे पिछले 20 वर्ष से कोटा में ही स्थायी निवासी थीं। वे कोटा के पुष्टिमार्गीय आचार्य लीलास्थ गोस्वामी श्री पुरुषोत्तम लालजी महाराज की बेटीजी थीं। वे 65 वर्ष की थीं। वे अपने पीछे दो पुत्र, एक पौत्र और 3 पौत्रियों सहित भरा पूरा परिवार छोड़ गयी हैं।
दशाह बैठक में उनके सम्बंधियों में समधी जूनागढ़-चौपासनी के गोस्वामी श्री विट्ठलनाथजी महाराज, (गीतेश भट्ट के श्वसुर) एवं समधी गोस्वामी श्री पुरुषोत्तम लालजी महाराज (पंकज गोस्वामी) (गोपी रमण भट्ट के श्‍वसुर) के घर से सौ0 लता गोस्वामी पधारे। बिलखा से गोस्वामी श्री ललित महाराज, कोटा के उनके भ्राता गोस्वामी श्री गोपाल लालजी महाराज, गोस्वामी शरद बावा, गोस्वामी विनय बावा, झालावाड़ से उनके जेठ वरिष्ठ साहित्याकार पं0 गदाधर भट्ट, गौतम भट्ट, गजेंद्र भट्ट, रेही श्री नंदनंदन भट्ट, जामनगर से रेही श्री मधुर, जयपुर से श्री अरुण शर्मा, सुरेंद्र गोस्वामी, रेही योगेश, गोकुल से श्री गोकुलेन्दु भट्ट (बबलू), कोटा से गिरिवर भट्ट, गोविन्द भट्ट, पंचनदी श्री प्रभाष तैलंग, डॉ0 भालचंद तैलंग, श्री सुबोध तैलंग, रेही श्री नारायण लाल तैलंग, श्री अनिल तैलंग, रेही अनिल शर्मा, वैद्य श्री मुरलीधर शर्मा, आत्रेय श्री नवनीत शर्मा, रेही गोपाल कृष्ण भट्ट, ध्रुव भट्ट, अहमदाबाद से रेही श्री कमलेश, रेही चिन्तन, श्री ललित बाबू, श्री रमेश करंजी, श्री अरुण करंजी एवं गर्वित भट्ट (बेटीजी के पौत्र) आदि सपरिवार उपस्थित हुए। बेटीजी के दोनों पुत्र श्री गोपीरमण भट्ट एवं श्री गीतेश भट्ट भद्र हुए। श्री गोपीरमण भट्ट ने उत्तर कर्म की क्रिया सम्पन्न की। उत्तर कर्म जयपुर से पधारे उपाध्याय श्री श्याम सुंदरजी ने सम्पन्न करवाया।

रविवार, 11 जुलाई 2010

बैठक में मात्र औपचारिकता पूरी हुई

कोटा। दाक्षिणात्य वैल्लनाडु सजातीय ब्राह्मण परिवारों की मासिक बैठक 11 जुलाई सायं संगठन की कार्यकारी सदस्या रेही श्रीमती (सौ0) संध्या तैलंग पत्‍नी रेही श्री नारायण तैलंग के निवास 106 कृष्णा कुटीर, सराय कायस्थान, कैथूनीपोल पर आयोजित हुई। अध्यक्ष पंचनदी श्री प्रभाष तैलंग की अनुपस्थिति और अनेकों सदस्यों के न आने पर बैठक में औपचारिकता ही पूरी हो पाई। आगामी चुनावों के लिए प्रस्तावित समीक्षा, संगठन के पंजीकरण से सम्बंधित कार्य आदि के लिए की जाने वाली वार्ता अध्यक्ष श्री प्रभाष तैलंग के न आने से स्थगित रखी गयी। श्री प्रभाष तैलंग सपरिवार 10 जुलाई को ही चार धाम की यात्रा से लौटे थे इसलिए स्वास्‍थ्‍य की दृष्टि से उन्होंने उपस्थित होने में असमर्थता जताई।
बैठक में उपस्थित संगठन के पदाधिकारी सचिव रेही श्री किशोर कुमार शर्मा, कोषाध्यक्ष रेही श्री मदन मोहन तैलंग, कार्यकारी सदस्या सौ0 संध्या तैलंग द्वारा उपस्थित अन्य पारिवारिक सदस्यों के मध्य यह निर्णय लिया गया कि अगले माह की बैठक से पूर्व अध्यक्ष श्री प्रभाष तैलंग के निवास पर कार्यकारिणी की एक बैठक रख ली जाये तथा संगठन की वर्तमान स्थिति पर विचार विमर्श कर आगामी निर्णय के लिए मार्गदर्शन प्राप्त किया जाये।
बैठक में यह बात भी विचार की गयी कि हर माह सपरिवार उपस्थिति को कुछ समय के लिए स्थागित रखा जाये और हर माह केवल कार्यकारिणी की ही बैठक आयोजित हो और समस्याओं आदि पर विचार किया जाये तथा मूलभूत निर्णय लिये जायें। कोषाध्यक्ष श्री मदन मोहन तैलंग ने संगठन के पंजीकरण के सम्बंध में आई अड़चनों के बारे में स्पष्ट‍ किया कि यदि इसी कार्यकारिणी के कार्यकाल में यदि पंजीकरण कराना है, तो अगली कार्यकारिणी के पदाधिकारियों को पंजीयन में तीन माह से पूर्व कोई परिवर्तन सम्भव नहीं होगा और पहले परिवर्तन करने हेतु फि‍र से शुल्क जमा कराना होगा, इसलिए बेहतर होगा कि पंजीकरण कराना है, तो तीन माह तक कोई चुनाव नहीं कराये जायें अथवा आगामी चुनाव कराने के बाद नयी कार्यकारिणी द्वारा पंजीकरण की कार्यवाही सम्‍पन्न की जाये, ताकि अतिरिक्त पंजीयन शुल्क नहीं देना पड़े। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि पंजीकरण कराने का उद्देश्य यदि सरकार द्वारा समाज के लिए रियायती दर पर जमीन उपलब्ध करना है तो यह अब संभव नहीं है क्योंकि सरकार ने समाजों को जमीन देने पर वर्तमान में पाबंदी लगाई हुई है। श्रीमती संध्याजी ने संगठन को पहले मजबूत बनाने पर जोर दिया और सामाजिक अंतर्कलह को खत्म कर संगठन को कठोर निर्णय लिये जाने पर जोर दिया। उन्होंने भी केवल कार्यकारिणी की ही बैठक आयोजित करने पर जोर दिया और समाज के मध्यम आय वर्ग में होने के कारण आज की महँगाई के दौर में समय और धन के व्यर्थ के व्यय में कटौती के लिए आग्रह किया। उन्होंने त्रैमासिक या पर्व त्योहार पर ही सामूहिक मिलन आयोजित करने के लिए अपील की।
बैठक में 10 दिनों से पारीक हॉस्पीटल में आई सी यू में जिन्दगी और मौत से जूझ रहीं श्रीमती स्नेहलता भट्ट के स्वास्‍थ्‍य पर चिन्ता व्यक्त करते हुए सदस्य रेही श्री गोपाल कृष्ण भट्ट ने कहा कि संगठन के पदाधिकारियों को जाकर उनके स्वास्‍थ्‍य के बारे में जानकारी लेनी चाहिए और परिवार से मिलना चाहिए ताकि उन्हें हिम्मत मिले। उन्होंने ध्यान दिलाया कि कोटा में समाज अल्पससंख्यक है। समाज में आर्थिक रूप से अधिकतर बहुत सम्पन्न नहीं है। समाज के किसी भी परिवार में कोई दुर्घटना, असामयिक घटना, या जिंदगी और मौत से जूझती स्थिति की कोई परिस्थिति हो तो इसे गंभीरता से ले कर उस पर सतत नजर रखने की आवश्यकता है, तभी लोगों को संगठन पर विश्वास बनेगा और भविष्य में लोग संगठन को अपनी आवश्यकता बना पायेंगे। उन्होंने कार्यकारिणी के सदस्यों से आग्रह किया कि अध्यक्ष महोदय के साथ कार्यकारिणी श्रीमती स्नेहलता भट्ट को हॉस्पीटल में देखने जाये और परिवार को हिम्मत बँधाये।
अल्पाहार के साथ बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में कार्यकारिणी के सदस्यों के अतिरिक्‍त्‍ा रेही श्रीमती ब्रजप्रिया-श्री गोपाल कृष्ण भट्ट, बागरोदी सौ0 हरिप्रिया, श्रीमती जयमाला, आत्रेय श्रीमती निर्मला शर्मा-श्री नवनीत शर्मा, श्रीमती मीनाक्षी शर्मा, पंचनदी श्रीमती शालिनी तैलंग, रेही श्रीमती पिंकी-श्री अविनाश तैलंग, श्री निखिल तैलंग, रेही स्वप्निल तैलंग, रेही श्री नारायण लाल तैलंग, छभैया श्री महेंद्र भट्ट, ध्रुव भट्ट, रेही चारु भट्ट, श्री अनिल तैलंग ने भाग लिया।

रविवार, 13 जून 2010

संगठन का पंजीकरण और संयुक्त बैंक खाता इसी माह। दिग्‍दर्शिका का समाजार्पण। संगठन के विकास के लिए कठोर निर्णय लिये जाने होंगे- वैद्यजी

कोटा-13 जून। कोटा नगर के दाक्षिणात्‍य वेल्लनाडु ब्राह्मण सजातियों की माह जून की बैठक संगठन सचिव श्री किशोर कुमार शर्मा के दादाबाड़ी निवास पर सोल्लास सम्पन्न हुई। बैठक सायं 5 बजे आरंभ हो गयी। आरंभ में श्री किशोर शर्मा ने पधारे सभी सजातियों का स्वागत किया। कार्यकारिणी के सदस्यों के आने के बाद सर्वप्रथम वयोवृद्ध रेही श्री मुरलीधर शर्मा सेवानिवृत्त आयुर्वेदाचार्य जो कि संगठन के सचिव श्री किशोर शर्मा के पिता भी हैं, द्वारा “सान्निध्य स्रोत” के सौजन्य से प्रकाशित दिग्दर्शिका का कलाया खोल कर समाजार्पण किया। 12 पृष्ठीय दिग्दर्शिका को देख कर उन्होंने कहा कि लंबे समय से कोटा झालावाड़ में रह रहे सजातियों को एक दूसरे से सम्पर्क करने और कोटा झालावाड़ से बाहर रह रहे सजातियों से सम्‍पर्क करने में जो असुविधा होती थी, यह दिग्दर्शिका उन्हें और समीप लाएगी। उन्होंने समाज के उन लोगों से भी आह्वान किया, जो लंबे समय से बैठकों में उपस्थित नहीं हो रहे हैं। उन्‍होंने संगठन को और सुदृढ़ बनाने के लिए सभी को यथायोग्य तन-मन-धन से सहयोग करने की अपील की। इसके लिए यदि कठोर निर्णय भी लेने हों तो लिये जायें। उन्‍होंने 1950 के दशक के सुदृढ़ संगठन के बारे में बताते हुए कहा कि उस समय भी “दिव्यादर्श” जैसी पत्रिका निकलती थी। "निर्णय सिंधु" के निर्णयों का कठोरता से पालन किया जाता था। संगठन की समाज में धाक थी। समाज के वरिष्ठ आचार्य और विद्वान् लोगों द्वारा उसे सफलतापूर्वक लंबे समय तक चलाया गया। धीरे-धीरे अनुशासन की कमी, पलायन और संस्कारों के विचलन से समाज की स्थिति धीरे-धीरे निर्बल होती गयी। आज संगठन ही नहीं समाज की दशा भी शोचनीय है। इसके लिए सार्थक प्रयास करने होंगे।
संगठन के सचिव श्री किशोर कुमार शर्मा ने कहा कि दिग्दर्शिका की एक-एक प्रति हमारे सजातीय बहुल्य नगरों जयपुर, बीकानेर, अहमदाबाद, मुंबई आदि भी भेजी जाएगी और वहां स्थापित सजातीय इकाइयों के माध्यम से कोटा की पहचान बढ़ायी जाएगी। संगठन के कार्यकारी सदस्य श्री सुबोध तैलंग ने बताया कि समाज की कोटा में एक विशेष प्रतिष्ठा है। समाज के अंतर्गत आने वाले पुष्टिमार्गीय वल्लभ सम्प्रदाय के मंदिर जैसे श्री मथुराधीशजी, बड़े महाप्रभुजी, जैजै मंदिर आदि मंदिरों के लाखों लोग अनुयायी हैं और शहर में इनका एक अलग स्थान है।
बैठक में उपस्थित "सान्निध्य स्रोत" के संपादक और सजातीय सदस्य श्री गोपाल कृष्ण भट्ट ‘आकुल’ ने भी बताया कि दिग्दार्शिका में समय-समय पर होने वाले संशोधनों को ईमेल के माध्यम से उनके ब्लॉग “सान्निध्य स्रोत” में आदिनांक/अपडेटेड किया जाता रहेगा और संगठन चाहेगा तो नये समाजोपयोगी साहित्य के साथ नयी कार्यकारिणी के काल में दो वर्ष में एक बार इसे पुनर्प्रकाशित किया जा सकेगा। उन्होंने सभी सदस्यों को और संगठन के पदाधिकारियों का आभार प्रदर्शित किया और कहा कि उन्होंने समय निकाल कर दिग्दर्शिका के लिए पते, मोबाइल नं- और ईमेल पते आदि उपलब्ध करवाये। भट्ट ने यह भी आग्रह किया कि आज कोटा में भी युवावर्ग तकनीकी साधन संसाधनों का उपयोग ज्यादा से ज्यादा करने लगा है, इसलिए उन्होंने विशेष रूप से समाज के लिए ‘सान्निध्य स्रोत’ का ई संस्करण http://saannidhyasrot.blogspot.com विकसित किया है, इसलिए समाज की नयी-नयी जानकारी जो भी हो, उनके ईमेल पते, ब्लॉग को उपलब्ध करवायें, ताकि देश-विदेश में बैठे हमारे सजातीय इस पत्रिका के माध्‍यम से समाज की जानकारी प्राप्त कर सकें। लंदन, अमेरिका, आस्ट्रेलिया, रूस, कुवैत, इजिप्ट आदि अनेकों देशों में हमारे सजातीय अपनी आजीविका के लिए बसे हुए हैं।
बैठक में महिला सदस्‍यों ने भी बढ़ कर हिस्‍सा लिया। प्रतिनिधि श्रीमती संध्‍या तैलंग ने नये चुनाव कराने पर बल दिया। उन्‍होने भी पत्रिका को एक सराहनीय कदम बताया और कहा कि इससे समाज के लोगों से सम्‍पर्क आसान हो जायेगा। जयपुर से पधारीं अध्‍यापिका और कोषाध्‍यक्ष श्री मदन मोहन तैलंग की बहिन श्रीमती निर्मला तैलंग ने कोटा समाज की सक्रियता पर प्रसन्‍नता व्‍यक्‍त की। उन्‍होंने पत्रिका पढ़ कर कहा कि इसके बारे में जयपुर में प्रचार प्रसार किया जायेगा।
बैठक में संगठन के आगामी चुनावों के बारे में वार्ता हुई। अध्यक्ष श्री प्रभाष तैलंग कोटा से बाहर होने के कारण बैठक में सम्मिलित नहीं हो पाये थे। उनसे मोबाइल पर सम्पर्क किया गया। उन्होंने 11 जुलाई को होने वाली अगली बैठक में उपस्थित होने का आश्वासन दिया और बताया कि संगठन के कार्यकाल के विगत दो वर्षों की समीक्षा भी वहीं की जायेगी।
बैठक में संगठन के पंजीकरण के सम्बंध में एक प्रभावी निर्णय लेते हुए कोषाध्यक्ष श्री मदनमोहन तैलंग ने बताया कि सभी वांछित दस्तावेजात आदि तैयार कर लिये गये हैं। पंजीकरण के लिए कम से कम 11 सदस्यों के साथ जा कर पंजीकरण कार्यालय में उपस्थित होना है, ताकि रजिस्ट्रार पंजीकरण के समक्ष सभी के हस्ताक्षर करवा कर इसे अंतिम स्वरूप प्रदान किया जा सके। अपने कार्यकाल में यदि पंजीकरण हो जाता है, तो संगठन की आने वाली कार्यकारिणी को भविष्य में कोई भी निणर्य लेने में असुविधा नहीं होगी। उन्होंने कहा कि यदि संगठन के चुनाव से पूर्व पंजीकरण हो जाता है, तो शीघ्र ही संगठन का किसी भी राष्ट्रीयकृत बैंक में संयुक्त खाता खुलवा कर संचित कोष की वृद्धि के लिए तीव्र प्रयास किये जायेंगे ताकि आगामी योजनायें मूर्तरूप ले सकें।
बैठक में समाज के लगभग 30 लोगों ने भाग लिया। वैद्य रेही श्री मुरलीधर शर्मा, संगठन सचिव ऱेही श्री किशोर शर्मा- श्रीमती मीनाक्षी शर्मा, कोषाध्यक्ष रेही श्री मदन मोहन तैलंग, जयपुर से पधारीं निर्मला तैलंग पत्‍नी श्री प्रमोद तैलंग, कार्यकारी सदस्या रेही श्रीमती संध्या तैलंग, पंचनदी श्री सुबोध तैलंग, सदस्यगणों में रेही गोपाल कृष्ण भट्ट, बागरोदी श्रीमती हरिप्रिया, रेही श्री नारायण तैलंग, रेही श्री अविनाश तैलंग-पिंकी तैलंग, रेही श्री वरुण शर्मा, श्री महेंद्र कुमार भट्ट, श्रीवत्स‍ श्री अनिल तैलंग- श्रीमती कुमुद तैलंग, आत्रेय श्री नवनीत शर्मा-श्रीमती निर्मला शर्मा, बागरोदी गिरवर भट्ट आदि बैठक में उपस्थि‍त थे।
आगामी बैठक के लिए सचिव श्री किशोर शर्मा ने कहा कि एक बैठक आचार्य गोस्वामी श्री गोपाल लालजी महाराज के निवास श्री बड़े महाप्रभुजी मंदिर पाटनपोल पर भी रखी जायेगी। इसके लिए आचार्य श्री गोपाल लालजी, श्री शरदबाबा से विचार विमर्श कर तिथि तय की जायेगी, ताकि बैठक में संगठन के अभी तक के प्रयासों के बारे में उन्‍हें बताया जा सके और उनसे भविष्य के लिए मार्गदर्शन प्राप्त किया जा सके। आगामी बैठक 11 जुलाई को संगठन के कोषाध्य्क्ष रेही श्री मदन मोहन तैलंग के निवास 106 कृष्णा कुटीर, सराय कायस्थान, कैथूनीपोल, कोटा पर सायं 5 बजे होना तय हुआ। अल्पाहार के पश्चात् बैठक सौहार्दपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुई।
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शनिवार, 12 जून 2010

13 जून की बैठक में गरमा गरम चुनावी बहस होने की संभावना। दिग्‍दर्शिका का वितरण होगा।

कोटा। सजातियों की जून माह की बैठक रविवार 13 जून को संगठन के सचिव रेही श्री किशोर कुमार शर्मा के निवास 251 शास्त्री नगर, दादाबाड़ी में आयोजित की गयी है। बैठक सायं 5 बजे आरंभ होगी। कोटा झालावाड़ के सभी सजातियों एवं सदस्यों को मोबाइल पर सूचना भिजवा दी गयी है। बैठक में संगठन के आगामी चुनाव के लिए दावेदारों के लिए निर्णय होगा। इस बार चुनाव वोटिंग प्रणाली से कराये जाने का प्रस्ताव है। पिछली बार अस्थाई रूप से चुनाव निर्विरोध सम्पन्न हुआ था। बैठक में प्रत्याशियों के नाम के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि तय की जाने की भी संभावना है। अध्यक्ष श्री प्रभाष तैलंग व सचिव श्री किशोर कुमार शर्मा के अनुसार पिछले दो वर्षों के कार्यकारिणी के कार्यकाल की समीक्षा भी की जायेगी। बैठक में पूरी कार्यकारिणी के उपस्थित होने की संभावना व्यक्त की जा रही है। दो वर्ष में भी बैंक खाता नहीं खुलने, संगठन के पंजीकरण नहीं किये जाने पर गरमा गरम बहस हो सकती है। संगठन की कार्यकारिणी का दो वर्षीय कार्यकाल असफल बताया जा रहा है। इस कार्यकाल के दौरान कोई प्रभावी कार्य नहीं हुए। मासिक बैठकों में लंबे समय तक ढील रही। मासिक शुल्क एकत्रित नहीं हुआ। कोई ठोस निर्णय नहीं लिये गये। कोटा झालावाड़ में निवास कर रहे निवासियों के पते, दूरभाष, मोबाइल नं0 एवं ईमेल पते की दिग्दर्शिका का वितरण भी उपस्थित लोगों को कार्यकारिणी द्वारा किया जायेगा। त्रैमासिक पत्रिका "सान्निध्य स्रोत" के सौजन्य से निकाली गयी ये दिग्‍दर्शिका संपादक श्री गोपाल कृष्ण भट्ट द्वारा विकसित की गयी है। बैठक में उन्होंने भी उपस्थित होने की अपनी स्वींकृति भिजवा दी है।

6 Sixes in an over in 20-Twenty World Cup by Yuvraj Singh
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बुधवार, 9 जून 2010

मेरे फेवरिट वीडियोज़

मेरा नाम जोकर- जाने कहॉं गये वो दिन
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देवदास- ए डोला रे डोला रे डोला
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राम तेरी गंगा मैली- इक राधा इक मीरा
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हीर रॉंझा- ये दुनिया ये महफि‍ल मेरे काम की नहीं
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सोमवार, 7 जून 2010

सजातियों की दिग्‍दर्शिका प्रकाशित। मासिक बैठक में वितरण


कोटा। लंबे समय से प्रतीक्षित हाड़ौती में निवास कर रहे सजातियों के आवास के पते, दूरभाष नं0 और मोबाइल नं0 की दिग्‍दर्शिका तैयार हें। सान्निध्‍य स्रोत के सौजन्‍य से यह दिग्‍दर्शिका माह जून की बैठक में 13 जून को वितरित की जाएगी। बैठक 13 जून को सायं संगठन के सचिव श्री किशोर कुमार शर्मा के निवास 251 शास्‍त्रीनगर, दादाबाड़ी पर आयोजित होगी। श्री किशोर कुमार शर्मा ने बताया कि संगठन के चुनाव और दिग्‍दर्शिका के वितरण को लेकर समाज में बहुत उत्‍साह है। उन्‍होंने ज्‍यादा से ज्‍यादा लोगों की उपस्थिति की आशा व्‍यक्‍त की है। उन्‍होंने दिग्‍दर्शिका का अवलोकन करते हुए उसमें उपलब्‍ध साहित्‍य की प्रशंसा की। "आकुल" ने भी इस पत्रिका का परिचय देते हुए कहा कि इसमें सजातियों का परिचय, सजातियों के संदर्भ में कोटा के बारे में साहित्‍य, सजातियों के पते, दूरभाष नं0, मोबाइल नं0, उपलब्‍ध ईमेल आदि को भी इसमें सम्मिलित किया है।

सोमवार, 10 मई 2010

9 मई को आर के पुरम में सजातीय बैठक सम्‍पन्‍न


कोटा। दाक्षिणात्य वैल्लनाडु ब्राह्मण सजातीय समाज की बैठक 9 मई को आर के पुरम स्थित श्री गिरिवर भट्ट के यहां सायं 5बजे आयोजित हुई। सर्वप्रथम ई-पत्रिका “सान्निध्य स्रोत” के बारे में सम्पादक गोपाल कृष्ण भट्ट “आकुल” ने श्री गिरिवर भट्ट के निवास पर उपलबध कम्‍प्‍यूटर पर नेट आरंभ कर ब्‍लॉग "http://www.saannidhyasrot.spotblog.com का प्रदर्शन किया। उन्होंने सभी सदस्यों से आग्रह किया कि ज्यादा से ज्यादा सजातियों से उनके ई-मेल उपलब्ध करवायें और उन्‍हें इस पत्रिका के बारे में बतायें, ताकि उन्हें इस पत्रिका के बारे में ई-मेल भेजा जा सके। उन्होंने आह्वान भी किया कि सभी इस ब्लॉग पर अपने विचार, समाचार, टिप्पणी, चित्र आदि दे सकते हैं अथवा ईमेल के जरिये भी भेजे जा सकते हैं। अनुकूल पाये जाने पर उन्हें ब्लॉ‍ग पर समाचार संदर्भ में ही प्रदर्शित किया जाना संभव होगा। बैठक में ‍फिर हाड़ौती संभाग में कोटा और झालावाड़ में निवास कर रहे सजातियों के पते व दूरभाष एवं मोबाइल नं0 की दिग्दर्शिका को अंतिम रुप दिया गया। बैठक मे संगठन के चुनाव कराये जाने पर भी चर्चा हुई। जून माह की बैठक रेही श्री किशोर शर्मा के 251 दादाबाड़ी, निवास पर होगी, जिसमें चुनाव की तिथि तय की जायेगी और दिग्दर्शिका वितरित की जायेगी। बैठक में संगठन सचिव रेही श्री किशोर कुमार शर्मा, कोषाध्यक्ष रेही श्री मदन मोहन तैलंग, महिला प्रतिनिधि रेही श्रीमती संध्या तैलंग, सदस्य बागरोदी गिरिवर भट्ट, बागरोदी डॉ0 तूलिका भट्ट, रेही श्री गोपाल कृष्ण भट्ट, रेही श्रीमती ब्रजप्रिया भट्ट, रेही श्री नारायण लाल तैलंग, रेही श्री अविनाश भट्ट, रेही सुश्री चारु तैलंग, बागरोदी चि0 आयुष भट्ट उपस्थित थे। अल्पाहार के साथ बैठक सौहार्दपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुई।

गुरुवार, 6 मई 2010

सजातीय मासिक बैठक 9 मई को

कोटा। समाज की मासिक बैठक 9 मई रविवार को श्री गिरिवर भट्ट के निवास आर के पुरम् सायं 4 बजे से आयोजित की गयी है। बैठक में 1 मई से आरंभ हुई ई-पत्रिका 'सान्‍निध्‍य स्रोत' के बारे में श्री 'आकुल' प्रकाश डालेंगे। कोटा के सजातियों के पते व सम्‍पर्क दूरभाष मोबाइल नं। के लिए श्री गोपाल कृष्‍ण्‍ा भट्ट 'आकुल' द्वारा विकसित की गयी दिग्‍दर्शिका को अंतिम रूप दिया जायेगा। बैठक में संगठन के आगामी चुनाव के लिए भी रूपरेखा पर विचार किया जायेगा और चुनाव की तिथि भी तय की जायेगी। माह जून के लिए किस सजातीय के निवास पर बैठक की जायेगी, इसकी भी घोषणा की जायेगी। संगठन के सचिव श्री किशोर कुमार शर्मा ने अधिकतर सजातियों को बैठक में उपस्‍थित होने के लिए दूरभाष्‍ा पर सूचित किया।

बुधवार, 5 मई 2010

कोटा सजातीय परिवारों के पते और मोबाइल के लिए दिग्‍दर्शिका शीघ्र


हाड़ौती संभाग (कोटा, बूंदी, बारां, झालावाड़) में केवल कोटा और झालावाड़ में ही सजातीय निवास कर रहे हैं। इसलिए कोटा और झालावाड़ में निवास कर रहे दाक्षिणात्‍य वेल्‍लनाडु ब्राह्मण सजातियों की दिग्‍दर्शिका 2010 शीघ्र आपको यहां दिखाई देगी। बस भ्रमण करते रहिए और सप्‍ताह में कुछ न कुछ नया पढिये।

शनिवार, 1 मई 2010

सान्‍निध्‍य स्रोत ई पत्रिका आरंभ


दाक्षिणात्‍य वैल्‍लनाडु ब्राह्मण सजातीय समाज की ई पत्रिका
('सान्‍निध्‍य स्रोत' त्रैमासिक पत्रिका की सह पत्रिका)