मंगलवार, 14 मई 2013

समाज के कार्टून चितेरों का जखीरा


दाक्षिणात्‍य वैल्‍लनाडु ब्राह्मण समाज की त्रैमासिक पत्रिका 'तैलंगकुलम्' द्वारा समाज के कार्टून चितेरों के बारे में उनके कला और संस्‍कृति के क्षेत्र में उनके योगदान को दिग्‍दर्शित करती यह पुस्‍तक एक मील का पत्‍थर है। समाज के ही नहीं देश के नामचीन राजनीतिक कार्टूनिस्‍ट सुधीर तैलंग इसी कुल के कुलावतंस हैं। तैलंगकुलम द्वारा प्राकाशित यह पुस्‍तक उनका पहला विशेष संस्‍करण है। इसमें सुधीर गोस्‍वामी, क्षीरज तैलंग, अनूप गोस्‍वामी, सुशील गोस्‍वामी के अलावा समाज का कार्टून कला में अवदान आदि विषयों को समेटे यह 16 पृष्‍ठीय अनुपम संग्रह है।


तैलंगकुलम्, जयपुर से साभार। 

तैलंगकुलम् मई 2013 अंक प्रकाशित

कोटा। जयपुर से प्रकाशित दाक्षिणात्‍य वेल्‍लनाडु ब्राह्मण समाज का त्रैमासिक समाचार पत्र 'तैलंगकुलम्' मई 2013 का अंक प्रकाशित हो गया। सम्‍पादक श्री भानुकुमार गोस्‍वामी द्वारा प्रेषित अंक को देखें और रसास्‍वादन करें। अपने विचार प्रेषित करें, नये समाचार भेजें, परिवार में प्रस्‍ताव, नई खुशियों, युवावर्ग, प्रतिभाओं के समाचार समाचार पत्र को प्रेषित करें, समाचार पत्र का सदस्‍य बनें और बनायें।
सान्निध्‍य स्रोत को भी निम्‍न पते पर अपने समाचार सचित्र, लम्‍बें हों तो पी-डी-एफ- में भेजें। पता है- gkbhatt55@yahoo.co.in , aakulgkb@gmail.com .


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तैलंगकुलम् , जयपुर से साभार। 

बुधवार, 7 मार्च 2012

सान्निध्य: रंग भंग चंग का त्‍‍योहार है होली

सान्निध्य: रंग भंग चंग का त्‍‍योहार है होली: रंग भंग चंग का त्योहार है होली। रँगता गया जो इसमें होली उसकी तो हो ली।। लेके चंग टोली झूमो नाचो व गाओ। जि‍ससे मि‍लो तुम रंग लगा के अपना ब...

गुरुवार, 27 अक्टूबर 2011

छोटे महाप्रभुजी मंदि‍र में अन्‍नकूटोत्‍सव

कोटा। महावीर नगर द्वि‍तीय स्थित छोटे महाप्रभुजी में अन्नकूटोत्सव सोल्लास मनाया गया। सवेरे गोवर्धनपूजा में गि‍रि‍राजजी का दुग्धाभि‍षेक कि‍या गया और बाद में प्रभू ने अन्नकूट अरोगा। परम्परानुसार अन्नकूट में छत्तीस सामग्री तैयार की गयी थीं। पुष्टिय‍मार्गीय सम्प्रादाय के मंदि‍रों में भगवान् श्री कृष्ण के बाल स्वरूप में ब्रज की लीलाओं को पोषि‍त कि‍या जाता है, इंद्रदमन लीला के बाद गोवर्धन पर्वत की तलहटी में ब्रज में ग्वाल बाल सहि‍त पूरे कुनबे के साथ भोजन के लि‍ए मंदि‍रों में ‘कुनवाड़ा’, ब्रज के तीर्थ बरसाने में छप्पन कटोरा स्थान पर राधारानी के पि‍ता वृषभान जी ने राधा के साथ श्री कृष्ण के वि‍वाह के सुअवसर पर भोजन दि‍या था वह छप्पन भोग के नाम से प्रख्यात है और मंदि‍रों में उसी परम्परा को नि‍भाते हुए मंदि‍रों में शरदोत्सव स्वरूप कुनवाड़े और छप्प्नभोग के मि‍ले जुले स्वरूप में अन्नोकूटोत्सव मनाया जाता है, जि‍समें गोवर्धनपूजा भी होती है, जो गोवंश के संरक्षण के संकल्प का द्योतक है और अन्नकूट में छत्तीस प्रकार की सामग्री का प्रचलन भी है। सवेरे 10 बजे अन्नकूट के दर्शन खोले गये। दर्शनार्थि‍यों ने अन्नकूट के दर्शन का लाभ उठाया। मंदि‍र की अध्यक्षा गोस्वा‍मी रेणुका बहुजी अस्व्स्थ होने के कारण मथुरा से नहीं पधार सकीं, महावीर नगर स्थि‍‍त उनकी पुत्री ब्रजप्रि‍या बेटीजी ने अन्नकूट की सेवा की। उन्होंने सामग्री के बारे में बताया कि‍ छत्तीस सामग्रि‍यों में सखरी, अनसखरी, फल, दूधघर और सूखे मेवों का भोग लगाया जाता है। सर्दी के कारण प्रभू हटड़ी में बि‍राजते हैं। शरद ऋतु खूब खाने पीने और पहनने का मौसम है, इसलि‍ए इसमें सबसे पहले प्रभू को अर्पि‍त कि‍या जाता है, तत्पश्चात् पूरे शरदकाल में सब खूब खाओ। बाल स्वरूप के मनुहार में सभी प्रकार की सामग्री ऋतु के आरंभ में प्रभू को अरोगाई जाती हैं।
अन्नकूट में सखरी में चावल को कोट, सभी प्रकार की मौसमी सब्जियाँ जैसे, मेथी, पालक, बैंगन, आलू आदि‍, दालें, कढ़ी, पाँच प्रकार के भात, पगी हुई अर्थात अनसखरी में मि‍ठाइयाँ जैसे गुंझि‍या, मेवाबाटी, ठौर, मठड़ी, दीवला, घेवर, बाबर, बूरा बुरकी, लौंगवटी, कोट पर सजाने के लि‍ए शंख, चक्र, गदा, पद्म और शि‍खर, चार पाँच प्रकार के लड्डू, मैसू पाक, मोहनथार, आदि‍, फलों में मौसमी फल जैसे सीताफल, सिंघाड़ा, केला, सेब, अनार और सूखे मेवे में काजू, बादाम, दूधघर में काजू कतली, बादाम पाक, गि‍री पाक, माखन-मि‍श्री, मेवाबाटी आदि‍ का भोग लगाया गया।

बुधवार, 28 सितंबर 2011

सान्‍नि‍ध्‍य सेतु: शक्ति की अधि‍ष्‍ठात्री देवी माँ दुर्गा

सान्‍नि‍ध्‍य सेतु: शक्ति की अधि‍ष्‍ठात्री देवी माँ दुर्गा: अश्‍वि‍न मास के शुक्ल पक्ष के शुरुआती नौ दि‍न भारतीय संस्कृति‍ में नवरात्र के नाम से शक्ति‍ की पूजा के लि‍ए नि‍र्धारि‍त है इन दि‍नों शक्ति ‍...

रविवार, 11 सितंबर 2011

सान्निध्य: गत एक वर्ष में राष्ट्रूभाषा हिंदी ने क्या खोया क्य...

सान्निध्य: गत एक वर्ष में राष्ट्रूभाषा हिंदी ने क्या खोया क्य...: 14 सि‍तम्‍बर हि‍न्‍दी दि‍वस है। आइये उस दि‍न को कुछ खास अंदाज़ में मनायें। संकल्‍प लें। हि‍न्‍दी की एक कवि‍ता लि‍खें, एक वाक्‍य लि‍खें, बच्...